Wednesday, 26 December 2012

शारीरिक संबंध से इन्कार बना तलाक का आधार


नई दिल्ली, वैवाहिक जीवन में सामान्य शारीरिक संबंध कायम करने से मना करना बिल्कुल गलत है। शादीशुदा जीवन में पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध बहुत मायने रखते हैं और दोनों में से किसी के भी द्वारा इससे इन्कार करना दूसरे पर प्रताड़ना है। इसी टिप्पणी के साथ दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने उस महिला की तलाक की याचिका स्वीकार कर ली, जिसके पति ने यह कहते हुए यौन संबंध बनाने से इन्कार कर दिया था कि पहले वह अपनी शैक्षणिक योग्यता व नौकरी को साबित करे।
दरअसल शादी से पहले दिए गए अपने बायोडाटा में याचिकाकर्ता महिला ने खुद के नौकरी में होने की बात कही थी। जबकि वह नौकरी नहीं करती थी। इसके बाद पति ने उसके साथ यौन संबंध बनाना छोड़ दिया। इसी को आधार बनाकर महिला ने निचली अदालत से तलाक ले लिया था।
मामला हाईकोर्ट में आने पर न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और कहा कि शारीरिक संबंध बनाने से पहले शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र पेश करने की शर्त रखना निश्चित रूप से नृशंसता और क्रूरता है और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत यह तलाक के आधारों में से एक है। हाईकोर्ट में महिला के पति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उसने शादी के लिए अखबार में विज्ञापन दिया था। जिसके जवाब में महिला ने खुद के नौकरी में होने का दावा किया था।
सुहागरात को दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए थे, लेकिन इसके बाद पति ने शारीरिक संबंध बनाने से इन्कार कर दिया। पति का कहना था कि शादी से पूर्व उसकी पत्नी नौकरी नहीं करती थी। कई बार उसने शिक्षा के सर्टिफिकेट दिखाने के लिए कहा, लेकिन उसने सर्टिफिकेट नहीं दिखाया। पति का कहना था कि शहर में सहज जीवन-यापन करने के लिए उसे कामकाजी महिला की जरूरत थी।
न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने अपने आदेश में कहा है कि पति ने इस पवित्र रिश्ते को वस्तु विनियम प्रणाली बना दिया। पति ने पत्नी की नौकरी को ज्यादा तवज्जो दी। कोर्ट ने पति की उस दलील को ठुकरा दिया कि वह 
सर्टिफिकेट दिखाने के लिए सिर्फ इसलिए कहता था, ताकि उसके लिए उपयुक्त नौकरी खोज सके। आर्थिक रूप से मजबूत होने पर ही वह बच्चा चाहता था, इसलिए उसने आगे से संबंध बनाने से इन्कार कर दिया।

सेक्‍स को उद्योग का दर्जा

Sex love money, sex industry in India
 ईश्‍वर ने इस सृष्टि की रचना के लिये सभी प्राणियों में नर तथा मादा दो लिंग बनाये ताकि  इनके समागम से संतानोत्‍पत्ति हो और उन प्राणियों की संख्‍या में वृद्धि हो. कहते हैं संसार में 18 हजार प्राणी हैं जिनमें मनुष्‍य सर्वश्रेष्‍ठ माना जाता है क्‍योंकि उसे एक सशक्‍त दिमाग दिया गया है जिससे वह सोच सकता हैं और उस सोच के माध्‍यम से नये नये आविष्‍कार कर सकता हैं, कौन सी बात या वस्‍तु उसके लिये हितकारी है और कौन सी हानिकारक, इसका निर्णय कर सकता है. इन प्राणियों में केवल मनुष्‍य ही एक ऐसा प्राणी है जो स्‍वयं अपनी जीविका की व्‍यवस्‍था करता है, चाहे नौकरी कर के या कोई व्‍यापार कर के. प्रकृति के नियमानुसार संसार में जनसंख्‍या में वृद्धि का एकमात्र साधन सेक्‍स है. लोगों में सेक्‍स के प्रति रुचि बनी रहे इसलिये कुदरत ने इसमें कुछ क्षणों का आनंद रख दिया तथा सेक्‍स हेतु प्रेरित होने के लिये नर तथा मादा के बीच परस्‍पर आकर्षण की व्‍यवस्‍था कर दी.  पशु पक्षियों में सशक्‍त मष्तिष्‍क नहीं होता इसलिये वे प्रकृति के नियमों के अनुरूप सेक्‍स द्वारा अपनी संख्‍या में वृद्धि करते रहते हैं. पशु पक्षियों में अप्राकृतिक यौन संबंध नहीं पाये जाते.  ईश्‍वर ने मनुष्‍य को सशक्‍त म‍ष्तिष्‍क दिया ताकि वह रचनात्‍मक कार्य कर सके किंतु मनुष्‍य एक बड़े वर्ग ने कई मामलों में इसका दुरुपयोग किया, विशेषत: सेक्‍स के मामले में.  प्रकृति ने सेक्‍स का सिस्‍टम केवल जनसंख्‍या वृद्धि के लिये लागू किया किंतु मनुष्‍य ने सेक्‍स में अनुभूत होने वाले आनंद के कुछ क्षणों को सेक्‍स का प्रधान उद्देश्‍य बना लिया.  संतानोत्‍पत्ति रोकने के नये नये उपाय ढूंढ लिये तथा काम-सुख प्राप्‍त करने के लिये नये नये प्रयोग प्रारंभ कर दिये.  भारत में तो अधिकांश लोग धर्म परायण हैं, पाश्‍चात्‍य देशों के लोगों ने सेक्‍स की इतनी विकृति विधियां निकाल लीं कि प्रकृति के सारे कानून भंग हो गये. प्राकृतिक सेक्‍स की जगह ओरल सेक्‍स (मुख मैथुन), रेक्‍टल सेक्‍स (गुदा मैथुन), हस्‍त मैथुन, समलैंगिक संभोग और न जाने कितनी गंदगियों का आविष्‍कार कर लिया. पुरुषों के लिये स्‍त्री विहीन सेक्‍स हेतु रबर की गुडि़यां तथा स्त्रियों के लिये पुरुषविहीन सेक्‍स हेतु वायब्रेटर जैसे कृत्रिम साधन बना लिये.  अच्‍छी बातों का प्रचार प्रसार कठिन कार्य है किंतु बुरी बातें जंगल में आग की तरह फैलती हैं. पहले कोई गुंडा भी किसी से बलात्‍कार करता था तो खुली जगह में नहीं करता था, कुछ न कुछ आड़ या पर्दा कर लेता था किंतु अब पढ़े लिखे सभ्‍य समाज में ग्रुप सेक्‍स (सामूहिक रतिक्रिया), वाइफ स्‍वैपिंग (पत्नियों की अदला बदली), खुले मैदान में समूह बना कर फ्री सेक्‍स करने जैसी बुराइयां तेजी से फैल रही हैं.

     पहले कुछ महिलायें केवल गरीबी के कारण देह व्‍यापार अपनाने को विवश होती थीं किंतु उन्‍हें समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता था. आज बहुत से संभ्रांत परिवारों की महिलाओं ने इसे बिजनेस प्रमोशन का हथियार बना लिया है, बहुत से मध्‍यम वर्गीय परिवारों की म‍हिलाओं ने इसे पार्ट टाइम जाब की तरह अपना लिया है. एक सर्वे के अनुसार मुंबई, कोलकाता, दिल्‍ली, चेन्‍नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, पूना जैसे महानगरों में विवाहित महिलायें घर से आफिस टाइम से एक घंटा पहले निकलती हैं और शाम को दो-तीन घंटे बाद आती हैं. इस एक्‍स्‍ट्रा टाइम में वे पार्ट टाइम सेक्‍स वर्कर का कार्य करती हैं. दिलचस्‍प बात यह है कि यह बातें परिवार में सभी को मालूम रहती है, महिला की सास तथा ननदें काम में हांथ बंटा कर उसे शीघ्र तैयार होने में मदद करती हैं, पति तो पत्‍नी को ग्राहक के पास छोड़ने तथा समय पर वापस लाने का काम भी मुस्‍तैदी से करता है.  भौतिकता के इस युग ने धार्मिक तथा सांस्‍कृतिक मान्‍यताओं एवं नैतिक मूल्‍यों को कुचल कर रख दिया है. आज कई घरों में पति पत्‍नी के बीच समर्पण तथा वफादारी का स्‍थान मौज मस्‍ती ने ले लिया है. कुछ अमेरिकन कंपनीज अपने प्रोडक्‍ट बेचने के लिये चरित्रहीनता को बढ़ावा देने वाले अश्‍लील विज्ञापन दिखा रही है.  भारत में एक कहावत थी कि यहां नारी की पूजा की जाती है. वर्तमान में नारी को केवल एक कंज्‍यूमेबिल आइटम के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है. सिगरेट/शराब का विज्ञापन हो या मर्दों के परिधानों का या माचिस की डिब्‍बी का, विज्ञापन में दिखेगी औरती की ही तस्‍वीर, वह भी कामुक मुद्रा में.  पुरुष प्रधान समाज में पुरुष ने स्‍त्री का दैहिक शोषण अपना जन्‍मसिद्ध अधिकार मान लिया है.  पाश्‍चात्‍य सभ्‍यता के अंधानुकरण तथा भौतिक सुविधाओं के चक्‍कर में स्त्रियों का एक बड़ा वर्ग भी इतना पथ भ्रष्‍ट हो चुका है कि वह नाजायज यौन संबंधों को दैहिक शोषण नहीं बल्कि वर्तमान युग की आवश्‍यकता मानता है. आज पर-पुरुष या पर-नारी के साथ सेक्‍स संबंध स्‍थापित करना अपराध नहीं बल्कि फैशन बन चुका है. हद तो यह है कि भारतीय दंड विधान में भी अवैध यौन संबंधों पर दंड की व्‍यवस्‍था नहीं है.  यदि कोई व्‍यक्ति पत्‍नी के रहते हुये दूसरी स्‍त्री से विवाह कर ले तो वह अपराध की श्रेणी में आता है तथा सजा हो जाती है किंतु यदि वही व्‍यक्ति दूसरा विवाह न कर उसी पर-नारी या कई पर-नारियों के साथ सेक्‍स का आनंद प्राप्‍त करता रहे तो उस पर अपराध दर्ज नहीं होगा.

     कुछ विदेशी कंपनियां इलेक्‍ट्रानिक मीडिया की सहायता से अप्राकृतिक सेक्‍स तथा अवैध यौन संबंधों को बढ़ावा दे कर गर्भ निरोधक सामग्रियों तथा यौन जन्‍य गुप्‍त रोगों की दवाओं का भारत में निर्यात कर अरबों रुपये प्रति वर्ष का मुनाफा काट रही हैं. अवैध यौन संबंधों को अघोषित मान्‍यता मिल जाने के कारण अब हर तरफ सेक्‍स ही सेक्‍स दिखाई दे रहा है. पहले मां-बाप के बीच चल रहे सेक्‍स संबंधों का पता संतानों को नहीं चल पाता था,  अब इंटरनेट खोलिये, हर प्रतिष्ठित समाचार वेबसाइट पर अवैध यौन संबंधों के समाचार भरे पड़े मिलेंगे. सड़क पर खड़ी कार में सेक्‍स के फोटो, थ्री-व्‍हीलर में सड़क के किनारे सेक्‍स के सचित्र समाचार, सब देखिये. होटलों में, पार्कों में, बसों में, लोकल ट्रेनों में, आफिसों में सभी जगह लोग अवैध यौन संबंधों का आनंद उठाते मिल जायेंगे, वह भी दिन दहाड़े.  पहले टीचर्स, डाक्‍टर्स तथा पुलिस को महिलाओं का रक्षक माना जाता था, अब इन्‍हीं पर महिलाओं का अपनी हवस का शिकार बनाने के आरोप लग रहे हैं. कुछ माह पूर्व एक सरकारी मेडिकल कालेज की एक छात्रा ने शिकायत की कि उसे डाक्‍टरी की परीक्षा उत्‍तीर्ण करने के लिये उससे सेक्‍स की मांग की जा रही है. दुर्भाग्‍यवश, सेक्‍स  को सफलता की कुंजी मान कर चलने वाले चरित्रहीनों का इतना प्रचंड बहुमत हो चुका है कि उनके सामने मुट्ठी भर चरित्रवान अल्‍पसंख्‍यक होने का सम्‍मान भी खो चुके हैं सो उस छात्रा का समर्थन करने के बजाय बहुत से छात्र छात्राओं ने उस पीडि़ता के विरुद्ध मुहिम छेड़ दी.  किंतु कुदरत का कानून अटल तथा सर्वोपरि है, अंधेर गर्दी की छूट नहीं देता. जांच में पता चला कि छात्रा की शिकायत सही थी. सेक्‍स फार मार्क्‍स का यह खेल केवल टीचिंग स्‍टाफ तक सीमित नहीं था बल्कि कुछ दलाल बदनाम करने की धमकी दे कर छात्राओं को बड़े नेताओं तथा व्‍यापारियों के पास भी दैहिक शोषण हेतु जाने के लिये विवश करते थे, यानि दैहिक शोषण का एक अंतहीन सिलसिला जो आत्‍महत्‍या या हत्‍या पर ही थम सकता था. बहरहाल, अभी यह मामला संबंधित प्रदेश के उच्‍च न्‍यायालय में है.
     सरकारी कार्यालयों में जो अधिकारी तथा कर्मचारी महत्‍वपूर्ण पदों पर आसीन हैं तथा उनके राजनीतिक आकाओं से काम निकलवाने के लिये बड़े व्‍यापारिक प्रतिष्‍ठानों ने कुछ महिलाओं को मोटी सैलरी तथा कमीशन पर नियुक्‍त कर रखा है. इनमें अधिकतर वे महिलायें होती हैं जो महत्‍वाकांक्षाओं के सागर में इतनी अधिक डूबी होती हैं कि नारी के सबसे बड़े आभूषण लज्‍जा को सबसे पहले तिलांजलि देती हैं फिर पतिविहीन रहने का निर्णय ले लेती हैं.  या तो शादी ही नहीं करतीं या तलाक ले लेती हैं या फिर पति से केवल औपचारिक संबंध रखती हैं. ये महिलायें फाइव स्‍टार कल्‍चर में ढली होती हैं इसलिये कोई इन पर उंगली उठाने का साहस नहीं कर पाता. ये पर-स्‍त्री लोलुप राजनेताओं तथा बड़े अधिकारियों को आसानी से अपने जाल में फंसा लेती हैं. भ्रष्‍ट नेता तथा अधिकारी तो स्‍वयं ही इस अंधे कुयें में कूदने को उतावले रहते हैं, खग जाने खग ही का भाषा वाले फार्मूले से तत्‍काल दोस्‍ती हो जाती है. इस प्रकार अवैध यौन संबंधों से बड़े बड़े ठेके और सप्‍लाई आर्डर हथिया लिये जाते हैं. लोग जो काम पैसों की मोटी रिश्‍वत दे कर नहीं करा पाते वे इन लिपी पुती महिलाओं को कुछ घंटों के लिये भेज कर आसानी से करा लेते हैं. ऐसी महिलायें भी अपनी इस लाइफ स्‍टाइल से खुश रहती हैं क्‍योंकि न तो किसी पुरुष (पति) की गुलामी करनी है, न ही घर गृहस्‍थी का झंझट उठाना है, न ही किसी के दबाव में रहना है. बड़े नेताओं और अधिकारियों से दोस्‍ती मुफ्त में. जिस महिला की पोलिटिकल तथा ब्‍यूरोक्रेटिक सर्किल में जितनी पकड़ होगी, बिजनेस हाउसेस में उसकी उतनी ही ज्‍यादा पूछ परख होगी. बड़े नेताओं तथा अधिकारियों को एंटरटेन करने का खर्च भी महिला को नहीं उठाना पड़ता क्‍योंकि यह खर्च भी संबंधित बिजनेस हाउस ही उठाता है. नेताओं तथा अधिकारियों से दोस्‍ती भी हो गई, कुछ खर्च भी नहीं हुआ, फ्री मौज मस्‍ती बोनस में मिली, इससे बढि़या और क्‍या हो सकता है.

     आज हर जगह सेक्‍स का बोल बाला हो रहा है. परीक्षा में पास होना है तो सेक्‍स चाहिये. नौकरी चाहिये तो सेक्‍स, अच्‍छी पोस्टिंग चाहिये तो सेक्‍स, मलाईदार पद चाहिये या पद पर बने रहना हो तो सेक्‍स. कई बार तो जीवित रहने के लिये सेक्‍स देना पड़ता है. गत वर्ष एक समाचार आया था कि कुछ पुलिस वालों ने कई लड़कियों को जबरन पकड़ कर उनके अश्‍लील एमएमएस बनाये फिर ब्‍लैक मेल कर सेक्‍स का आनंद स्‍वयं भी लेते रहे और अपने मित्रों को भी दिलाते रहे. एक बार किसी व्‍यक्ति का नाम थाने में दर्ज हो जाये तो कभी भी दिल बहलाने की व्‍यवस्‍था पुलिस वाले उसी के घर में कर लेते हैं नहीं तो उसे रोज थाने बुला कर जीवन कठिन बना देते हैं. आज के दौर में नाजायज सेक्‍स व्‍यवस्‍था का अभिन्‍न अंग बन गया है. सेक्‍स फार मार्क्‍स, सेक्‍स फार एपाइंटमेंट, सेक्‍स फार फ्यूचर, सेक्‍स फार पोस्टिंग, सेक्‍स फार जाब सेक्‍यूरिटी, सेक्‍स फार प्रमोशन/पोस्टिंग, सेक्‍स फार प्रोटेक्‍शन, सेक्‍स फार बिग कांट्रेक्‍ट्स, सेक्‍स फार बिग सप्‍लाई आर्डर्स, सेक्‍स फार इलेक्‍शन टिकिट, सेक्‍स फार मिनिस्‍टीरियल बर्थ, सेक्‍स फार एक्‍जेम्‍पशन फ्राम पेनाल्‍टी, सेक्‍स फार सरवाइवल. अब तो लोग दबी जुबान से ही सही, सेक्‍स फार कांस्‍टीट्यूशनल पोस्‍ट्स की भी चर्चा कर रहे हैं. हर जगह हर काम के लिये सेक्‍स पैरलल करेंसी की तरह काम कर रहा है, बल्कि सुपर करेंसी की तरह. आज की तारीख में इल्‍लीगल सेक्‍स अघोषित उद्योग का रूप धारण कर रहा है. बाबा रामदेव काला धन की माला जप रहे हैं और अन्‍ना हजारे सरकारी कार्यालयों में रिश्‍वतखोरी की किंतु सबसे बड़े उद्योग की शक्‍ल ले रहे कच्‍चे गोश्‍त (फ्लेश ट्रेडिंग) के इस धंधे की तरफ किसी का ध्‍यान नहीं जा रहा है.

मोकर्रम खान, वरिष्‍ठ पत्रकार/राजनीतिक विश्‍लेषक
पूर्व निजी सचिव, केंद्रीय शहरी विकास राज्‍य मंत्री. 
मोबाइल 9827079845, 9039879753 
e-mail : unsoldjournalism@gmail.com 

Popular characters inspire fashion sense: Kangna Ranaut


Actress Kangna Ranaut, whose quirky sense of style in Tanu Weds Manu was widely appreciated, says film characters play an important role in inspiring fashion sense among people. “People tend to follow the characters of the films that become popular. Like I heard the clothes of Tanu Weds Manu became very famous and with many more films.
With Krrish 3, I think a new fashion trend will start,” the 25-year-old said here Wednesday at the unveiling of Harper’s Bazaar magazine’s India cover, which features her.
Kangna believes it is school-going kids who get more inspired by Bollywood fashion. “During our school days, we also used to get inspired by Bollywood fashion and used to dress just like the movies of 1990s. So, I feel that maybe today’s school kids are getting inspired by us,” she said.
Kangna was last seen in Tezz this year. Currently, she is busy shooting for Shootout At Wadala and Krrish 3.

Source : IANS




SC issues guidelines to curb eve teasing

SC issues guidelines to curb eve teasing, www.prativad.com, depute women cops in plain clothes at public places, Terming the consequences of eve-teasing as disastrous, the Supreme Court issued a slew of guidelines to curb the menace and asked government to depute women cops in plain clothes at public places.

"All the state governments and Union territories are directed to depute plain-clothes female police officers in the precincts of bus stands, railway stations, metro stations, cinema theatres, shopping malls, parks, beaches, public service vehicles, places of worship etc. so as to monitor and supervise incidents of eve-teasing," a bench of justices K S Radhakrishnan and Dipak Misra said.
The court said the guidelines were necessary as there is "no uniform law" to deal with the menace.
"We notice that there is no uniform law in this country to curb eve-teasing effectively in or within the precincts of educational institutions, places of worship, bus stands, metro-stations, railway stations, cinema theatres, parks, beaches, places of festival, public service vehicles or any other similar place," the bench said.
The court, in its 26-page judgement, said the menace of eve teasing can be effectively curbed with a little effort and if unchecked, its consequences could be "disastrous" as like sexual harassment, eve-teasing amounts to violation of fundamental rights guaranteed under the Constitution.
"Consequences of not curbing such a menace, needless to say, are at times disastrous. There are many instances where girls of young age are being harassed, which sometimes may lead to serious psychological problems and even committing suicide.
"Every citizen in this country has the right to live with dignity and honour which is a fundamental right guaranteed under Article 21 of the Constitution of India. Sexual harassment like eve teasing amounts to violation of rights guaranteed under Articles 14, 15 as well," it said.
The apex court laid down the guidelines in the judgement by which it set aside a verdict of the Madras High Court.
The high court had set aside the judgement of a Central Administrative Tribunal upholding the dismissal of policeman S Samuthiram who had misbehaved with a married woman at about 11:00pm on 9th July 1999 at Tenkasi bus stand in Tiruneveli in a drunken state.
The court said, "The necessity of a proper legislation to curb eve-teasing is of extreme importance, even the Tamil Nadu Legislation(on the menace) has no teeth."
"The experiences of women and girl children in over-crowded buses, metros, trains etc. are horrendous and a painful ordeal. Before undertaking suitable legislation to curb eve-teasing, it is necessary to take at least some urgent measures so that it can be curtailed to some extent," it said while issuing various directions on the issue.
The state government and the Union territories will have to install CCTV in strategic positions which itself would be a deterrent and if detected, the offender could be caught, it said.
"Persons in-charge of educational institutions, places of worship, cinema theatres, railway stations, bus stands have to take steps as they deem fit to prevent eve-teasing, within their precincts and, on a complaint being made, they must pass on the information to the nearest police station or the women''s help centre," it added.
If the offence is committed in a commercial vehicle, then it would be required that a police complaint be lodged by the person in charge of the vehicle or otherwise, it would lead to cancellation of the permit to ply, it said.
"State governments and Union Territories are directed to establish Women Helpline in various cities and towns, so as to curb eve teasing within three months," it said.
Suitable sign boards, cautioning such act of eve-teasing, be exhibited in all public places, it said, adding that "Responsibility is also on the passers-by and on noticing such incident, they should also report the same to the nearest police station or to Women Helpline to save the victims from such crimes."

सावधान! मिनी स्कर्ट और टॉप पहनने पर होगी गिरफ्तारी


mini skirt, hot skirt, micro mini skirt, मिनी स्कर्ट और टॉप
लंदन : स्वाजीलैंड में महिलाओं को चेतावनी दी गई है कि मिनी स्कर्ट और टॉप पहनने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, क्योंकि ऐसे परिधान से महिलाओं के पेट का हिस्सा दिखाई देता है। स्वाजीलैंड दक्षिण अफ्रीका की सीमा से सटा एक साम्राज्य है, जो चारों ओर अन्य देशों से घिरा हुआ है।
पुलिस प्रवक्ता वेंडी लेटा ने कहा कि पुलिस 1889 के एक कानून को लागू करेगी, जिसमें शिकायत मिलने पर अनैतिक तरीके से कपड़े पहनने के आरोप में गिरफ्तारी का प्रावधान है। समाचार पत्र टाइम्स ऑफ स्वाजीलैंड के मुताबिक लेटा ने कहा, बलात्कारियों का काम आसान हो जाता है, क्योंकि आधे अधूरे वस्त्र पहनी महिलाओं के कपड़े हटाना आसान होता है। लेटा के मुताबिक कम वस्त्र पहनने वाली महिलाएं अनावश्यक रूप से दूसरों का ध्यान खींचती हैं। नवम्बर में दुष्कर्म के खिलाफ मिनी स्कर्ट में प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया था।
2000 में सरकार ने एक कानून बनाया था, जिसके मुताबिक 10 वर्ष या इससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए कम से कम घुटनों तक लम्बी स्कर्ट पहनना अनिवार्य है। यह कानून व्यभिचार तथा एड्स का प्रसार रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। हालांकि स्तनपान या सांस्कृतिक परिधान पहनने को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। 
(एजेंसी) 








सावधान! मिनी स्कर्ट और टॉप पहनने पर होगी गिरफ्तारी

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लंदन : स्वाजीलैंड में महिलाओं को चेतावनी दी गई है कि मिनी स्कर्ट और टॉप पहनने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, क्योंकि ऐसे परिधान से महिलाओं के पेट का हिस्सा दिखाई देता है। स्वाजीलैंड दक्षिण अफ्रीका की सीमा से सटा एक साम्राज्य है, जो चारों ओर अन्य देशों से घिरा हुआ है।
पुलिस प्रवक्ता वेंडी लेटा ने कहा कि पुलिस 1889 के एक कानून को लागू करेगी, जिसमें शिकायत मिलने पर अनैतिक तरीके से कपड़े पहनने के आरोप में गिरफ्तारी का प्रावधान है। समाचार पत्र टाइम्स ऑफ स्वाजीलैंड के मुताबिक लेटा ने कहा, बलात्कारियों का काम आसान हो जाता है, क्योंकि आधे अधूरे वस्त्र पहनी महिलाओं के कपड़े हटाना आसान होता है। लेटा के मुताबिक कम वस्त्र पहनने वाली महिलाएं अनावश्यक रूप से दूसरों का ध्यान खींचती हैं। नवम्बर में दुष्कर्म के खिलाफ मिनी स्कर्ट में प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया था।
2000 में सरकार ने एक कानून बनाया था, जिसके मुताबिक 10 वर्ष या इससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए कम से कम घुटनों तक लम्बी स्कर्ट पहनना अनिवार्य है। यह कानून व्यभिचार तथा एड्स का प्रसार रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। हालांकि स्तनपान या सांस्कृतिक परिधान पहनने को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। 
(एजेंसी) 








महिलाओं से अपील, अपने पतियों से सेक्स न करें, ताकि...

Appeal to women, not in a week sex, West African country of Togo decree latest political dilemma facing womenपश्चिमी अफ्रीकी देश टोगो में ताजा राजनीतिक फरमान ने महिलाओं के सामने धर्मसंकट पैदा कर दिया है। इन महिलाओं से कहा गया है कि वे एक सप्ताह तक अपने पतियों से सेक्स न करें। इससे हालिया प्रदर्शन में गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई के लिए सरकार पर दबाव बढ़ेगा।
बीबीसी के मुताबिक विपक्ष की नेता इसाबेले अमेगांवी ने महिलाओं से अपील है कि वे सोमवार से एक हफ्ते के लिए अपने पतियों के साथ सेक्स न करें। उन्होंने कहा, ''मैं सभी महिलाओं को एक हफ्ते की सेक्स हड़ताल, उपवास और दुआ करने के लिए आमंत्रित करती हूं ताकि हमारे गिरफ्तार भाइयों और पतियों की रिहाई हो सके।''
अमेगांवी ने कहा कि उन्होंने लाइबीरिया से प्रेरणा लेते हुए सेक्स हड़ताल की अपील की है। लाइबेरिया में गृह युद्ध के दौरान 2003 में महिलाओं ने शांति की खातिर अपने पतियों से सेक्स करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद 2009 में केन्या की औरतों ने भी गठबंधन सरकार के अधिकारियों के बीच जारी विवाद खत्म करने के लिए सेक्स हड़ताल की थी।